Saturday, March 6, 2010

नादान ख़्वाब मेरे

कुछ ख़्वाब मेरे निगाहों से कहीं खो गये हैं
गर तुम्हे दिखे कहीं, तो मुझे लौटा देना ।
नादान ख़्वाब मेरे, छोटे छोटे, परेशान से,
गर तुम्हे मिले कहीं, तो मुझे लौटा देना ॥

था बसाया एक छोटा सा संसार कहीं,
थी खुशीयां वहाँ पर, कोई गम नहीं ।
गर चलते चलते पँहुच जाओ वहाँ कभी,
तो पता वहाँ का मुझे भी बता देना ।।

ज़्यादा बड़े नहीं थे वो, थे मासूम वो ,
एक अमन की आस, एक प्यार की प्यास ।
गर तुम्हे मिल जाये कहीं दोनों, बेबस, लाचार,
तो मुझसे भी उन्हें मिला देना ॥

वो मेरी निगाहों मे बसी तुम्हारी परछाई ।
वो तुमसे ज़ुदा हो कर मेरी तन्हाई ॥
गर मिलकर सुनायें तुमको मेरी दास्ताँ कहीं ,
तो मुझे भी उस महफ़िल मे बुला लेना ॥

है वो दुनियादारी से बेखबर, अनजान ।
नहीं उन्हें, भले-बुरे की कुछ पहचान ॥
अश्क बनकर, निगाहों से छलके, खो गये,
गर तुम्हे दिखे कहीं, तो मुझे लौटा देना ।

कुछ ख़्वाब मेरे निगाहों से कहीं खो गये हैं।
गर तुम्हे मिले कहीं, तो मुझे लौटा देना ॥

7 comments:

  1. कुछ ख़्वाब मेरे निगाहों से कहीं खो गये हैं
    गर तुम्हे दिखे कहीं, तो मुझे लौटा देना ।
    नादान ख़्वाब मेरे, छोटे छोटे, परेशान से,
    गर तुम्हे मिले कहीं, तो मुझे लौटा देना ॥

    behad masum sa khyal hai..najuk pyaari si rachna.

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  2. है वो दुनियादारी से बेखबर, अनजान ।
    नहीं उन्हें, भले-बुरे की कुछ पहचान ॥
    अश्क बनकर, निगाहों से छलके, खो गये,
    गर तुम्हे दिखे कहीं, तो मुझे लौटा देना ।
    Bahut sunder bhavpoorn rachana.......
    Mujhe poora vishvas hai ddosare khayalo ke peeche ye chup.ya dhek gaye hai dhundiye avashy mil jaenge..........:)

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  3. bhavo se paripurn aapki yah rachanaachchi lagi dil se abhar.
    poonam

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  4. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

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  5. आपके लेखन ने इसे जानदार और शानदार बना दिया है....

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  6. था बसाया एक छोटा सा संसार कहीं,
    थी खुशीयां वहाँ पर, कोई गम नहीं ।
    गर चलते चलते पँहुच जाओ वहाँ कभी,
    तो पता वहाँ का मुझे भी बता देना ।।
    Dard me ek masoomiyat liye sarobaar...behad sundar!

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