Tuesday, February 16, 2010

एक सवाल तुमसे

वो प्यार तुम्हारा मुझसे, था पूरा, या आधा सच था तुम्हारा ।
वो मुझको अपना कहना, था पूरा, या आधा सच था तुम्हारा ॥
वो स्पर्श, वो आलिंगन, वो कोमल हाथों की छुवन ।
वो तुम्हारा मुझ में समाना, था पूरा, या आधा सच था तुम्हारा ॥

वो साथ चलना, वो मुझे गिरते हुए सम्हालना, वो हौसला बढ़ाना ।
वो वादा तुम्हारा मुझसे, था पूरा, या आधा सच था तुम्हारा ॥
वो तुम्हारे निगाहों मे स्वप्न मेरे, वो उन्हे पूरे करने की कस्में ।
वो आँसूओं से भरा पैमाना, था पूरा, या आधा सच था तुम्हारा ॥

वो हँसना, खिलखिलाना, वो मिलकर ज़िन्दगी कि किताब पढ़्ना ।
वो रूठना-मनाना तुम्हारा, था पूरा, या आधा सच था तुम्हारा ॥
वो कभी शर्म से निगाहें झुकाना, कभी बेखौफ़ बाहों में समाना ।
वो मेरे लिये दुनिया ठुकराना, था पूरा, या आधा सच था तुम्हारा ॥

वो एक मोड़ पर तुम्हारा ज़ुदा होना, मेरा उस मोड़ पर इन्तज़ार करना ।
वो तुम्हारा लौटने का वादा, था पूरा, या आधा सच था तुम्हारा ॥
आ जाओ की अब साँसों से रिशता भी खत्म होने को हैं ।
यकीन कर लूँ, तुम्हारा वादा, था पूरा, नहीं आधा सच था तुम्हारा ॥

4 comments:

  1. बाप रे इतना शक् , बहुत खूब पिरोया है आपने शब्दो में इनको ।

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  2. यकीन तो करना होगा.

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  3. asmanjas aur sath sanshay jaanleva sthitee kar dete hai ..........

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  4. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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