Monday, January 18, 2010

इरादा

नये साल में, चुन लीं हैं नई मन्ज़िलें।
नये पंख लगाये, उड़ चले पुराने परिन्दें ॥
नये ज़माने मे नया इतिहास रचने वाले ।
आसमान को छूने का दावा करने वाले ॥

अब तक जो होता रहा, अब ना हो पायेगा।
ज़ुल्म के आगे, कोई सर ना झुक पायेगा ॥
संभल जाओ, ऐ ज़ुल्म के ठेकेदारों,
हम आ गये हैं, वक्त को बदलने वाले ॥

हर चेहरे पर मुस्कान लाने का इरादा हैं ।
हर आँख से आँसू पोछने का वादा हैं ॥
अब हर अंधेरा मिटाने का ठाना हैं ।
हम रात के सीने से उज़ाला छीनने वाले ॥

काँटों पर चलकर फूलों की मंज़िल पाना हैं ।
अब किया हुआ हर वादा निभाना हैं ॥
अब ज़िन्दगी को दाँव पर लगाना हैं ।
हम हैं सर पर कफ़न बाँध कर निकलने वाले ॥

12 comments:

  1. हम हैं सर पर कफ़न बाँध कर निकलने वाले ....भाई दन दना दन पोस्ट लिखने के लिये शुक्रिया.....लिखते रहें हम पढ़ते रहेंगे ये हमारा वादा है।

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  2. Waah bhai Dipayanji apka blog jagat mein swagat hai. Achha likh rahe hai aap.

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  3. हर चेहरे पर मुस्कान लाने का इरादा हैं ।
    हर आँख से आँसू पोछने का वादा हैं ....

    भगवान करेआप अपने इरादे में कामयाब हों .......... सुंदर रचना है .........

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  4. बहुत सुन्दर रचना का सुन्दर इरादा
    बहुत बहुत आभार

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  5. सुंदर शब्दों के साथ ......बहुत सुंदर रचना...

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  6. बहुत ही नेक इरादा है । आमीन ।

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  7. संभल जाओ, ऐ ज़ुल्म के ठेकेदारों,
    हम आ गये हैं, वक्त को बदलने वाले ॥

    bahut jaroorat hai ise ghadee aise hee parivartan kee......aur josh kee.

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  8. बहुत सुन्दर रचना का सुन्दर इरादा
    बहुत बहुत आभार

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